Friday , August 12 2022

चलोगे तो ज्यादा चलोगे, तेज़ चलोगे तो दूर तलक चलोगे…

संजीव ओझा

ये सवाल नहीं जवाब है कि आखिर हम चाहते क्या हैं समस्या या समाधान? हम अपनी प्रासंगिकता को बनाये रखने के लिए समस्या का समाधान नहीं चाहते। चिकित्सक हूँ, रोजी-रोटी भी तो चलानी है। इसलिये अब सेहत को ही ले लो, बीमा कराने से क्या बीमार नहीं पड़ोगे? बीमार तो पड़ोगे, प्रदूषित हवा पानी मिलावटी दूध, या पेस्टिसाइड वाले फल और सब्जी, बाकी कीड़े मकोड़े, मच्छर-मख्खी, ट्रैफिक-तनाव जीने नहीं देंगे।

समाधान सरल है योग व आयुर्वेद को अपनाएं, और कोशिश करें कि बीमार न पड़ने पाएं। फिर भी अगर बीमार पड़ जाएं तो उचित नुकसान न करने वाला इलाज़ कराएं।

भूख सबसे बड़ी बीमारी है, फिर लालच और आलस का घेरा। यही राहु और केतु हैं सेहत के। घेरा तोड़ना हो तो चलो, क्योंकि चलोगे तो ज्यादा दिन चलोगे। तेज़ चलोगे तो दूर तलक चलोगे। लगातार चलोगे तो जीत पक्की। चाहे तो कछुअे से पूछ लो, जिसने खरगोश को हराया। बाकी सब तो धंधेबाज़ी है। #चरैवेति….#चरैवेति

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