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स्वस्थ रहना है तो किस प्रकार करें भोजन

स्वस्थ कौन नहीं रहना चाहता! लेकिन स्वस्थ रहना हो तो किस प्रकार भोजन करें यह उतना ही जरूरी है जितना जरूरी यह जानना है कि कैसा भोजन करें। भोजन कोई भी हो, कैसा भी हो, उसमें 6 रस होते हैं – मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त, और कषाय। स्वस्थ रहने के लिए भोजन में उपरोक्त 6 रस अवश्य होना चाहिए।  भोजन के पचने और उसके पोषक बनाने में सभी 6 रस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मधुर रस में मिठाइयाँ, कार्बोहाइड्रेट, अम्ल रस में खट्टी चीजें और आचार, लवण रस में नमक, कटु रस में मिर्च, अदरक, तिक्त रस में नींबू, करेला और कषाय रस में मट्ठा आदि शामिल हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने भोजन में इन सभी 6 रसों को अवश्य शामिल करना चाहिए। 

भोजन करते समय इन 6 रस के क्रम का ध्यान रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। भोजन में सबसे पहले मधुर रस का सेवन करना चाहिए क्योंकि भोजन आरंभ करते समय पेट खाली होने से वात का प्रकोप सर्वाधिक होता है और मधुर रस गुरु होने से वातरोधी होता है। साथ ही, उस समय सभी पाचक रस सक्रिय होते हैं इसलिये गुरु होने पर भी मधुर रस शीघ्र पच जाता है। भोजन के मध्य अम्ल एवं लवण रस का सेवन करना चाहिए क्योंकि पाचन क्रिया आरंभ होने से उस समय पित्त प्रकुपित होता है। अम्ल एवं लवण रस से पित्त का शमन हो जाता है। भोजन के अंत में कटु, तिक्त एवं कषाय रस का सेवन करना चाहिए क्योंकि उस समय कफ बढ़ा हुआ होता है और कटु तिक्त एवं कषाय रस कफ का शमन करते हैं। आंवला त्रिदोष शामक होने से इसे कभी लिया जा सकता है। जिनकी पाचन शक्ति कमजोर होती है उन्हें भोजन के पूर्व अदरक एवं सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए इससे पाचक रस सक्रिय हो जाते हैं और पाचन सम्यक होता है।

भोजन के साथ फल, सलाद एवं दूध का सेवन कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि अन्न और दूध तथा पक्व और अपक्व आहार विपरीत आहार माने गए हैं। क्योंकि अनाज अम्लीय एवं दूध क्षारीय होता है। केवल अत्यधिक शारीरिक श्रम करने वाले लोग पक्व और अपक्व आहार एक साथ ले सकते हैं। दूध रात को सोते समय, भोजन करने के कम से कम 3 घंटे बाद लेना चाहिए। यदि भोजन के साथ फल या सलाद का सेवन करना ही हो तो उसे पका कर ही लेना चाहिए।

भोजन के साथ फल, सलाद एवं दूध का सेवन कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि अन्न और दूध तथा पक्व और अपक्व आहार विपरीत आहार माने गए हैं। क्योंकि अनाज अम्लीय एवं दूध क्षारीय होता है। केवल अत्यधिक शारीरिक श्रम करने वाले लोग पक्व और अपक्व आहार एक साथ ले सकते हैं। दूध रात को सोते समय, भोजन करने के कम से कम 3 घंटे बाद लेना चाहिए। यदि भोजन के साथ फल या सलाद का सेवन करना ही हो तो उसे पका कर ही लेना चाहिए।

चूंकि शरीर का मन के साथ अत्यंत गहरा संबंध होता है इसलिए भोजन एकाग्रचित्त होकर मौन होकर करना चाहिए।

वैद्य मदन गोपाल वाजपेयी से जानिये भोजन का सही तरीक़ा

हमारे आहार में 6 रसों का क्या महत्व है, किस रस की क्या भूमिका होती है, भोजन कैसा होना चाहिए, भोजन किस प्रकार करना चाहिए, इस विषय पर श्री रामदत्त त्रिपाठी के साथ आयुषग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट के संस्थापक आचार्य डॉ। मदनगोपाल वाजपेयी विस्तारपूर्वक चर्चा कर रहे हैं।  

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