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फ़र्ज़ी ट्रामा सेंटर्स से लोगों की जान जोखिम में, सरकार स्वयं बनाये पर्याप्त इमरजेंसी हेल्थ केयर सिस्टम

देश के विभिन्न शहरों में तमाम ऐसे नर्सिंग होम / इमर्जेंसी अस्पताल या ट्रामा सेंटर चल रहे हैं , जहां ज़रूरत के मुताबिक़ डाक्टर, नर्स और उपकरण आदि नहीं होते. दुर्घटना के बाद गम्भीर मरीज़ वहाँ पहुँच जाते हैं, पर सही इलाज नहीं मिल पाता. मरीज़ों की जान भी चली जाती है. लखनऊ प्रशासन ने ढेर सारे ट्रामा सेंटर्स पर छापा मारा तब तमाम ख़ामियाँ उजागर हुईं. क़ायदे से सरकार और स्वास्थ्य को स्वयं यह ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए जिससे लोगों को इमर्जेंसी में प्राइवेट ट्राम सेंटर जाना ही न पड़े. तमाम शहरों में आजकल फ़र्ज़ी ट्राम सेंटर चल रहे हैं. इनमें न तो योग्य डाक्टर हैं और न ज़रूरी उपकरण.

https://en.wikipedia.org/wiki/Trauma_center

जब हम और आप किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार होते है..जब हम आपको तत्काल जीवनरक्षा के लिए ट्रामा सेंटरों का रुख करना होता है तो क्या होता है? क्या ये ट्रामा सेंटर हमें आश्वस्त कर पाते हैं कि वहां हमारी जीवन रक्षा हो पाएगी? क्या ये सेंटर्स सरकार की ओर से तय मानकों को पूरा करते हुए चलाए जा रहे हैं..ये सवाल इस वक्त इसलिए अहम हो गया है क्योंकि एक रिपोर्ट बता रही है कि इन ट्रामा सेंटरों में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं..प्रभावशाली लोगों ने ट्रामा सेंटर के नाम पर लूट की दुकान खोल दी है..जहां न तो प्रशिक्षित डाक्टर उपलब्ध हैं न ही आधुनिक मेडिकल उपकरण हैं..

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क्या है इसकी असलियत यही बात की है इस वीडियो में हमने एक्सपर्ट्स के साथइस चर्चा में शामिल हैंरामदत्त त्रिपाठी, पूर्व संवाददाता, BBC World news Serviceकुमार भवेश चंद्र, पूर्व संपादक, अमर उजालाएसएनएसयादव, पूर्व मुख्य मेडिकल ऑफिसरओम दत्त, मेडिकल एक्सपर्ट

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