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पत्रकारिता जगत को खामोश कर गये कमाल खान

कमाल खान। कल से पहले तक यह नाम सुनकर हमारे चेहरे पर एक गजब का तेज, गजब की चमक आ जाती थी, मानो उनके नाम में ही एक जादू था, कमाल था। नि:संदेह था भी। कमाल वाकई कमाल थे। उन जैसे पत्रकार और इंसान आज कम ही मिल पाते हैं।

एनडीटीवी के कमाल खान की रिपोर्टिंग, उनकी आवाज, बोलने का तरीका और हर बात को बयां करने का वो जबरदस्त अंदाज… शायद ही कभी कोई भूल पायेगा!

कमाल की अंतिम रिपोर्टिंग…

चुनाव में नेताओं की एक पार्टी से दूसरी पार्टी में भागमभाग के क्या हैं मायने? बता रहे हैं कमाल खान… pic.twitter.com/D4kyIuis3K— NDTV India (@ndtvindia) January 13, 2022

शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से कमाल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। यह खबर हम सभी के लिये वाकई स्तब्ध कर देने वाली थी। कल पूरा दिन मीडिया जगत कमाल की ही बातें करता रहा। उन्हें याद करता रहा। उनके जाने की तकलीफ को एक दूसरे के साथ बांटता रहा। लेकिन यह तकलीफ कम कहां होने वाली है? बस, दिल चाहता है बार बार उन्हें सुनते रहें। पढ़ने, लिखने और बोलने की उनकी शैली, बातचीत का उनका खास अंदाज और इन सबसे कहीं बढ़कर उनका आकर्षण, उनके व्यक्तित्व पर हम बातें करते रहें।

कमाल का लाइब्रेरी में घंटों बिताना, एचएएल कंपनी में रूसी भाषा से हिंदी के अनुवादक के रूप में काम करना, भगत सिंह के साथी रहे क्रांतिकारी शिव वर्मा के स्मृतियों को संजोने का काम करने से लेकर पत्रकारिता जगत में आने और यहां अपनी अलग और खास पहचान बनाने तक, उनके जीवन सफर के हर एक पहलू के बारे में चर्चा कर रहे हैं जाने माने वरिष्ठ पत्रकार आलोक जोशी, रामदत्त त्रिपाठी, वीरेंद्र यादव, शरत प्रधान, अंबरीश कुमार और हिमांशु बाजपेयी। आप भी सुनिये…

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