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क्या हाईकोर्ट के सुझाव पर विधानसभा चुनाव टालेगा आयोग ?

क्या यूपी में टलेंगे चुनाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग से चुनाव टालने की अपील ने तूल पकड़ लिया है. राजनीति जगत के लोग इस मामले में अपनी टिप्पणी दे रहें हैं. अभी हाल ही में सपा के प्रवक्ता रामगोपाल यादव ने हाईकोर्ट की इस अपील को बीजेपी से जोड़ते हुए कहा की जनता बीजेपी से नाराज है और इसलिए पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव को टालना चाहती है. मामला आगे बढ़ चुका है और मुख्य चुनाव आयोग ने टीम के साथ उत्तर प्रदेश आकर समीक्षा से निर्णय लेने की बात कही है.

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ वकील एवं एडीशनल एडवोकेट जनरल रमेश कुमार सिंह के अनुसार चुनाव आयोग का प्रदेश में आकर जांच करने और चुनाव सम्बंधित निर्णय लेने का फैसला हाईकोर्ट के अपील के कारण नहीं हुआ है. आयोग सामान्य तैयारी के लिए इस तरह के दौरे करता है .यह संयोग की बात है कि इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह आदेश कर दिया.

बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी ने इस संबंध में सीनियर एडवोकेट रमेश कुमार सिंह से विस्तार से बातचीत की .

आपको बताते चलें कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश के समक्ष चुनाव सम्बन्धी, चुनाव आयोग या प्रधानमंत्री मोदी से सम्बंधित कोई मुद्दा नहीं था. न्यायाधीश ने एक ज़मानत के मामले में चुनाव टालने का आदेश दिया .

चुनाव आयोग स्वयं ही एक स्वतंत्र संस्था है, ऐसे में हाई कोर्ट का चुनाव संबधी ऑर्डर किस हद तक सही है, यह सोचने वाली बात है.सीनियर एडवोकेट रमेश कुमार सिंह का कहना है जिन्हें भी हाई कोर्ट के इस आर्डर से असहमति है उनके पास सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की डबल बेंच में स्पेशल अपील में जाने के रास्ते खुले हैं. एकल न्यायाधीश का आदेश होने के कारण इसे सुप्रीम कोर्ट में डिवीज़न बेंच में स्पेशल अपील कर इसे चैलेंज किया जा सकता है. हाईकोर्ट का यह आर्डर, सुझाव के तौर पर दिया गया है. अतः यह चुनाव आयोग का स्वयं का विषय है कि वह इस सुझाव को कितने गंभीरता से देखती है.

सुनिये बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी से एडवोकेट रमेश कुमार सिंह की बातचीत.

क्या चुनाव आयोग हाईकोर्ट की बात मानेगा !

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